सिंध के साम्राज्य में बलूचिस्तान,पंजाब,कश्मीर, दक्षिणी अफगानिस्तान,और गुजरात के कुछ हिस्सों को शामिल किया गया था,सिंध साम्राज्य की स्थापना 540 ईसवी में दिवाजी राव द्वारा की गयी,राव परिवार के अंतिम शासक सहसी राव द्वितीय थे जिन्होंने अपने चाचा सिलबिज़ की मृत्यु के बाद सत्ता संभाली
राव के दरबार मे 671AD में सिंध के अगले शासक के रूप में उनके भाई चंदर सिलबिज़ की घोषणा हुई जिन्होंने 7 वर्षों तक सिंध पर शासन किया,चंदर के बाद चाचा सिलबिज़ के छोटे पुत्र राजकुमार दाहिर का राजतिलक सिंध के राजा के रूप में हुआ,
सिंध साम्राज्य पर 710 AD के आस पास अरब आक्रमणकारियों ने आक्रमण कर दिया बड़ी मात्रा में लूटपाट,हत्या,धर्म परिवर्तन अत्याचार किये,राज्य का कोष लूटना शुरू किया जो धीरे धीरे सिंध राज्य के पतन का कारण बना,
सिंध के इतिहास के दुखद अंत की शुरुआत तब हुई जब 1843 के आस पास अंग्रेजों के द्वारा सिंध के आखरी राज्य पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दिया,और 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रजो के जुल्म से बचने व मौत की सज़ा से बचने के लिये सिंध ने अपना हिस्सा अंग्रेजों को दे दिया,
आज भी सिंध प्रांत में सिंध राष्ट्रवाद जीवित है,अपनी पहचान के लिये संघर्ष कर रहा अपने पूर्वजों की पहचान के लिये जिन्होंने अरब आक्रमणकारियों व अंग्रजो से युद्ध किया व उनकी बर्बर यातनाएं भोगी और पाकिस्तान के जुल्म सहे लेकिन घुटनें नही टेके,हार नही मानी.
No comments:
Post a Comment