Thursday, September 5, 2019

राजा दाहिर

महान प्रतापी असीमित बलशाली राजा दाहिर की सिंध को बचाने के लिये किया गया भयंकर युद्ध:
दाहिर ने घोषणा कर दी थी कि बेडौइन 
(अरबी खानाबदोश) ले साथ कोई समझौता या बातचीत नही होगी,ये स्पष्ट संदेश था सेना के लिये भी की राष्ट्र की अस्मिता के लिये बलिदान देने का समय आ गया है

मेरा रक्त भी सिंध की इस महान भूमि,जिसमे हज़ारो महान पुरुषों का रक्त मिला हुआ है,सिंध पर अरबों के असफल आक्रमण की शुरुआत 711 ईस्वी में उम्मयद के खलीफा वालिद बिन अब्दुल की अगुवाई में तब तक हुआ जब तक की 713 ईस्वी में मोहम्मद बिन कासिम 2 में सिंध पर आक्रमण नही कर दिया,

कासिम की पीढ़ियों ने 100 वर्षों से अधिक समय सिंध पर शासन किया,अरब सेना ईरान के शासक सस्सनिद के सत्ता पतन के बाद सीधे सिंध के संपर्क में आया,और कासिम की अगुवाई में अरब सेना ने 713 ईस्वी तक सिंध पर आक्रमण किया और सफल भी हुआ,

राजा दाहिर ने जीवन की सबसे बड़ी गलती की जब उन्होंने रहम खाकर अपने व्यक्तिगत अरबी जनजाति अलाफी के सेनापति को शरण देकर की जो अरबी जनजाति उम्मयद के प्रतिद्वंद्वी थे,और दाहिर धोखा खा गये, इतिहास ने समय के साथ हमे एक बार और समझा दिया कि ये भरोसे के लायक नही है,

दाहिर को अलाफी की इस मदद की सज़ा अरबों के विश्वासघात के साथ मिली,अलाफी ने उम्मयद को राज्य की सारी गुप्त जानकारी दे दी जिससे उन्हें आक्रमण में आसानी हुई,और अलाफी द्वारा दी गयी गोपनीय रणनीतिक जानकारी की मदद से उम्मयद को सिंध को हराने में मदद मिली,

राजा दाहिर की सेना में 20 हज़ार पैदल सैनिक, 5 हज़ार घुड़सवार सैनिक व 26 हाथियों पर सवार लड़ाके थे जो बिन कासिम की सेना की तुलना में बहुत छोटी थी,कासिम की सेना में 50 हज़ार की संख्या में पैदल,घुड़सवार,व धनुर्धारी सैनिकों से परिपूर्ण थी,

विश्वासघाती अलाफी (जिसे राजा दाहिर ने रहम खाकर सिंध में शरण दी) अपने 500 सैनिकों के साथ उम्मयद की साथ शामिल हो गया व राजा दाहिर के खिलाफ युद्ध किया,उसे जिसने शरण दी बनाया व महान हिंदू धर्म के मूल्यों को दर्शाया,सिंध की लड़ाई 5 दिन चली,

युद्ध के पहले ही दिन कासिम ने रवाद क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और आसपास का पूरा क्षेत्र ही ढह गया,फिर अरब सेना जुइयूर तक पैदल ही आ गयी लगभग दाहिर की सेना के पास तक,उसके बाद सिंध की सेना का भारी नुकसान हुआ,वह भी तब जब युद्ध में राजा खुद मोर्चा संभाले हुए था,

राजा दाहिर शाही हाँथी पर सवार था और अकेला भगवान इंद्र की सेना के समान दुश्मन सैनिकों पर तीरों की बौछार कर रहा था,दुश्मन सेना में हड़कंप मच गया,दाहिर ने अकेले बेडौइन के हज़ारों सैनिकों को मार गिराया मरने वालों में दुश्मन सेना का सेनापति महरीन बिन तब्बू भी शामिल था,

युद्ध के अंतिम दिन अरब सेना द्वारा राजा दाहिर को उसके भाई दहिसरन,चचेरे भाई जयबिन व प्रमुख सेनापति व 2 भतीजों के साथ गिरफ्तार कर लिया वह युद्ध मे अपने अधिकांश सैनिकों के मारे जाने के बाद बचे हुए सैनिकों के साथ अरबों खिलाफ युद्ध का नेतृत्व कर रहा था,दाहिर नें अदम्य साहस का दिखाया,

दुश्मनों ने हाथी पर बैठे दाहिर को घेर कर घायल कर दिया और उसका वध कर उसका सर् काट कर बिन कासिम को भेंट किया,दाहिर की सेना के सभी सेनापति व उसके भाई बंधु राष्ट्र की रक्षा करते करते अरबो के हाथों शहीद हुए व अपने राष्ट्र सिंध की पावन मिट्टी में समा गये,

बाद में दमिश्क को खलीफा के पास भेज दिया,कहा जाता है,अरबी सैनिकों ने सिंध की 30 जवान लड़कियों जिनमे राजा दाहिर की 2 पुत्रियां राजकुमारी पुरमल देवी व राजकुमारी सूरज देवी भी शामिल थी,को बंदी बनाकर खलीफा की खिदमत में उसके हरम में भेज दिया,बहुत सी महिलाओं ने जुल्म से बचने को जौहर किया

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