Friday, April 21, 2017

भारतवर्ष की मानसिक गुलामी

राहुल गांधी चाहे दूरदृष्टा या उनमे नेतृत्व गुण हो या ना हो, परन्तु जिस परिवार में जन्म लिया है, उसके कारण प्रधानमंत्री की कुर्सी सहज ही प्राप्त थी, जो उन्होंने और उनके चमचों ने मिलकर बेवकूफी भरे राजनैतिक चाल के कारण गंवा दी. इस देश की जनता हज़ारों वर्षों से राजा, सल्तनत के अधीन रहने के कारण आज भी मानिसक रूप से गुलाम है और गोरी चमड़ी, अभिजात्य वर्ग को सहज ही अपने से अधिक सामर्थ्यवान समझती हुई उसे शासन सौंपने को तत्पर रहती है. अतः इस देश मे राहुल गांधी ही क्यों, राहुल गांधी का अगर 10 वर्षीय बेटा भी होता, तो उसे अपना शासक मानने में गुरेज़ नहीं करती. भारतीय आज भी मानते हैं कि एक शासक परिवार के यहाँ पैदा होनेवाला हर व्यक्ति शासन करने की क्षमता और योग्यता रखता है. इस देश मे, जहां चाणक्य ने एक साधारण व्यक्ति को चंद्रगुप्त मौर्य नामक सम्राट बना दिया, तब भी प्रतिभा, गुण की चर्चा की बजाय एक परिवार विशेष में जन्म लेना सबसे बड़ा गुण समझा जाता है. अतः इस देश का कुछ नहीं हो सकता.

No comments:

Post a Comment